Saturday, 8 September 2018

स्वतंत्र भारत आंदोलन

जागो भारत जागो  
हमें गुलाम इंडिया नहीं 
"आज़ाद हिन्द" अर्थात "स्वतंत्र भारत" चाहिए

आज़ादी के समय, मीडिया की चाटुकारिता ने गाँधी और नेहरू की कभी पोल नहीं खोली. लेकिन आज सच छुपाये नहीं छुप रहा. आज यूट्यूब और गूगल ने नेहरू और गाँधी की पोल खोल कर रख दी है. यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियोस वायरल हुए हैं, जो पूरे सबूतों के साथ  इनके नंगे सच उजागर कर रहे हैं. जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्त्व में आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिक फिरंगी सेना के दांत खट्टे करते हुए अपनी जान पर खेल रहे थे, तब तथाकथित महात्मा, गाँधी पराई स्त्रियों के साथ निर्वस्त्र विचरण कर, सोकर औरवीभत्स हरकतों को ब्रह्मचर्य प्रयोग का नाम दे रहे थे, इन दुष्कृत्यों का खुलासा स्वयं मनु बेन की डायरी से होता है. नेहरू और उसके खानदान के तो लगभग सभी कृत्य राष्ट्रविरोधी हैं, जिसने गाँधी के कंधे पर बन्दूक रखकर हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू संस्कृति का विनाश करने के सारे प्रयास किये, और भारतीय जनता की अनभिज्ञता के कारण वह अनेक हिन्दू संस्कृति विध्वंसक कार्यों में सफल भी हो गया. ब्रिटिश शासन ने नेताजी की सेना के हाथों सत्ता खोने के डर से नेहरू जैसे चाटुकार को देश सौंप दिया.वीर भगत सिंह व उनके सहयोगियों ने स्वतंत्र देश के स्वप्न को पूरा करने के लिए न केवल प्रयास किया, वरन उन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान की रूपरेखा भी तैयार कर ली थी. परन्तु फिरंगियों और उनके चाटुकार भारतीयों ने उन स्वप्नों को ध्वस्त कर दिया. उनके लेख नष्ट कर दिए गए. और अब नेहरू के चापलूस कहते हैं, की भगत सिंह ने जनता को नेहरू का अनुसरण करने के लिए कहा था. पर अब वीडियो वायरल हो रहे हैं कि इन ब्रिटिश चाटुकारों को देश चलाने के लिये  ९० साल की लीज़ पर दे दिया गया था. अगर ये सच है तो क्यों नहीं हम सच्ची स्वतंत्रता को अपना लेते, सुभाष चंद्र बोस जी के "आज़ाद हिन्द" के स्वप्न को सच कर लेते. क्योंकि फिरंगियों ने इंडिया, अपने चापलूसों को लीज़ पर दिया था, सनातन भारत नहीं. 

जागो भारत जागो  हमें गुलाम इंडिया नहीं, "आज़ाद हिन्द" अर्थात "स्वतंत्र भारत"चाहिए

इंदौर के विख्यात देवी अहिल्या विश्व विद्यालय ने यही प्रयास जनता के मध्य लाने का प्रयास किया है, उन्होंने एक आवेदन पर जनता के हस्ताक्षर कर प्रधानमंत्री को सौपने का निश्चय किया है, कि भारत को केवल भारत नाम से जाना जाये, न कि राष्ट्र विरोधियों द्वारा दिए गए सम्बोधनों   इंडिया और हिन्दुस्तान के द्वारा.
कृपया जन जागृति में सहयोग अपेक्षित है.


भारतीय


Courtesy
1) https://www.youtube.com/watch?v=XadCAC3jMkw
2) https://www.youtube.com/watch?v=GA2yU2f3vpY
3) https://www.youtube.com/watch?v=gaiAgGXsXu4
4) https://www.youtube.com/watch?v=gaiAgGXsXu4
http://www.dauniv.ac.in/notices/News280219.pdf

Friday, 31 August 2018

पूर्ण कर्पूर आरती (Poorna Karpoor Aarati)




ॐ नमः शिवाय!
पूर्ण कर्पूर आरती

कर्पूर  गौरं  करुणावतारम, संसार सारम भुजगेन्द्र हारं
सदावसंतं हृदयारविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि
कर्पूर पूरेण मनोहरेण, सुवर्ण पात्राम जग सांगतेन
प्रदीप्त वासाय स्तव सांगतेन, निरञ्जनम तं जगदीश कुर्यात...

Thursday, 13 October 2016

कवि और उसकी काल्पनिक प्रेमिका का यथार्थ संवाद Written by Prachi Satav

कवि

एक कवि ने अपनी काल्पनिक प्रेमिका से पूछा,
क्या ही अच्छा होता, यदि तुम वास्तविकता में मेरे साथ होती.

 काल्पनिक प्रेमिका ने हँसकर कहा,
यदि मैं तुम्हारे साथ होती,

तो कविता लिखने की जगह

तुम मेरे साथ घर के राशन का हिसाब कर रहे होते.

Saturday, 1 October 2016

पेड़, जो सारा जीवन हमें देते हैं। written by Prachi Satav

पेड़, जो सारा जीवन हमें देते हैं। 
धूल के कण उड़ रहे थे धूप और गर्मी भरे सफर में, 
इसलिए हमने आँखों पर काला चश्मा लगा लिया 
थोड़ी देर में उस राह पर पहुँचे जहाँ घने पेड़ थे
उस राह में तीखी धूप को पेड़ों ने रोक लिया,
और हम भी मजबूर हो गए वो काला चश्मा निकालकर 
प्रकृति द्वारा प्रस्तुत सुंदरता को निहारने के लिए.
और उन पेड़ों द्वारा मिले सुकून और ठंडक को महसूस करने के लिए 
जहाँ हमने अब तक के सबसे अच्छे सेल्फी लिये।
और फिर याद आयी वो कहानियाँ , जो बचपन में सुनी थी,
परंतु उन पर विश्वास नहीं होता था, कि कैसे
भरी दुपहरी में एक पथिक पेड़ के नीचे ठंडक पाकर 
गहरी नींद में सो जाता था 
अब समझ आया कि पेड़, उस पथिक को कितने प्रेम से 
अपनी पत्तियों से पंखा झलकर सुलाते होंगे।
आज महसूस हुआ की ये वो ठंडक थी , कि 
जिसके आगे एयर कंडीशनर की कृत्रिम और महँगी ठंडक 
शरीर को बीमार करने का एक साधन मात्र है। 
मैने मन ही मन निश्चय किया कि 
पेड़ों से मिले इस प्रेम का उपकार मैं जरूर चुकाऊंगा 
घर के आसपास पौधे लगाकर उन्हें भी पेड़ बनाऊंगा
यदि आपने भी पेड़ पौधों के प्रेम को अनुभव किया हो कभी 
तो अपने आने वाली पीढ़ियों की भलाई के लिए पेड़ लगाएं अभी

आप चाहें विश्वास करें या नहीं किन्तु ये सत्य है,
कि पेड़ पौधों में भी भावनाएँ होती हैं, 
और "अतिथि देवो भव" और परमार्थ  के संस्कार,
जो हम मनुष्य भूल चुके हैं, 
पेड़ अपना सारा जीवन, उसे निभाते हैं

Friday, 30 September 2016

मैं एक नारी हूँ written by Prachi Satav

मैं थी और मैं हूँ

गंगा हूँ मैंयमुना हूँ मैंऔर सरस्वती भी मैं,
गायत्री मैंदुर्गा हूँ मैंऔर गृहलक्ष्मी भी मैं.
सुकुमारी सकुचाती सी, उज्जवल ज्योति थी मैं,
उद्विग्न भयंकर दावानल  प्रज्वल अग्नि हूँ मैं.
घर की बगिया को सींचती एक जलधारा थी मैं,
खंड खंड करती पाषाणों को, बनी प्रचंड लहर हूँ मैं

माँ पिता के प्रेम से  सिंचित, कोमल लतिका थी मैं

अब हूँ अभिघाती को चुभती बबूल की डाली मैं 
अब मुझमे प्रेम  ढूंढना जग की अपरिपक्वता है,
क्योंकि जग के अवचार से ही आयी मुझमे रागहीनता है.
मंद कुंद समझ देते निमित्त मुझे सुकुमारी कलिका का,
सावधानहरी प्रिया नहीं अब रूप हूँ मैं कालिका का.