Saturday, 25 May 2019

क्या सूरत में हुई भयंकर दुर्घटना का कारण व्यावहारिक ज्ञान का अभाव नहीं है?

आज सूरत में अत्यंत ह्रदय विदारक दुर्घटना घटी, जिसमे आग लगने पर बच्चों ने जान बचाने के लिए चौथी मंज़िल से छलांग लगाई, कई बच्चे घायल हुए, और कुछ के माता पिता, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें वहां पढ़ने भेज रहे थे, उनका स्वयं का भविष्य अंधकारमय हो गया. 
आत्मा को झकझोर देने वाले इस दुःख को वे सहन कर सकें, इतनी शक्ति भगवान उन्हें दे.
दुखद है कि दुर्घटना के समय उनके गुरु वहां उपस्थित होते हुए भी विकट परिस्थितियों में बच्चों के  साहस को सही दिशा प्रदान न कर सके.
क्योंकि चौथी मंज़िल से कूदने का साहस तो उन्होंने दिखाया. परन्तु बाकि बच्चे दम घुटने से, उचित निर्देशन के अभाव में  वे अपने प्राण गवा बैठे.
यदि उनके टीचर वहां उपलब्ध पर्दों और कपड़ों को  आपस में बाँध कर रस्सी बना लेते, तो इतने परिवारों को अपने बच्चों को न खोना पड़ता.
इसी प्रकार एक अंतर्राष्ट्रीय होटल में हुए हादसे  में जलकर और घुटन में मरने वालों में भारतीय सर्वाधिक थे, जापानियों और अन्य विदेशियों को ये मूलभूत व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त था, कि अचानक आग लगने पर गीले कपड़े से खुद को ढककर लेट जाने से प्राण बचाये जा सकते हैं, क्योंकि आग और धुआं ऊपर की ओर उठता है.

अत्यंत दयनीय परिस्थिति है, कि भारतीय पढ़ तो रहे हैं लेकिन ज्ञान प्राप्त नहीं कर पा रहे. फिरंगियों के जाने के बाद भी उनके द्वारा स्थापित की गयी शिक्षा पद्धति के ये भयानक दुष्परिणाम हैं, कि हम केवल किताबी ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं, व्यावहारिक ज्ञान नहीं.   
क्योंकि वर्तमान शिक्षा पद्धति सक्षम नहीं  है अतः हम लोगों को ही अपने बच्चों को सचेत करना होगा, जिससे आपात स्थिति में वे अपने आप को बचा सकें और अन्य की सहायता कर सकें.

अपने बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान और जानकारी देकर भविष्य में सूरत जैसी दुर्घटना को पुनः घटित होने से रोका जा सकता है.

Friday, 17 May 2019

देशभक्तों की व्यथा

देशभक्तों की व्यथा

तात्कालिक राजनेताओं के खेल के कारण कितने देशभक्त लोगों ने अत्यंत प्रतिभावान होते हुए भी भयंकर दरिद्रता और दुःख में जीवन बिताया, मुंशी प्रेमचंद इसका जीता जागता उदहारण हैं.
वे तात्कालिक भारत का सजीव चित्रण अपनी कहानियों के माध्यम से करते थे.
देशभक्ति के लेख लिखने के कारण फिरंगियों ने उनके साहित्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था, तब उन्हें अपना नाम "धनपत राय" से बदल कर मुंशी प्रेमचंद रखना पड़ा.
अत्यंत गरीबी में उन्होंने जीवन बिताया. इलाज के पैसे न होने के कारण वे ५६ वर्ष की अल्प आयु में ही
वे काल के गाल में समा गए.
वहीँ खुद को भारतीयों का प्रतिनिधि बताने वाली, फिरंगियों की चापलूस ब्रिगेड, का एक सदस्य, रविंद्र नाथ टैगोर, जिसने ब्रिटिश शासकों के लिए "जन गण मन" गीत लिखा, नोबल साहित्य पुरस्कार विजेता बना.
सभी देश प्रेमी भारतीय चाहते थे, कि श्री बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के गीत "वन्दे मातरम" को राष्ट्र गीत बनाया जाये, संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाया जाये, देश के बटवारे को रोका जाये, परन्तु धूर्त नेहरू ने देश प्रेमियों की एक न चलने दी. यहाँ तक कि शिक्षा से धर्म का नाता ही तुड़वा दिया. नतीजा, आज पढ़े लिखे अधिकांश युवक युवती, नैतिक मूल्यों से अनभिज्ञ हैं, और जाने अनजाने पतन के मार्ग पर अग्रसर हैं. 

Saturday, 6 April 2019

जब भी आप हेरिटेज ट्रेन में बैठकर पाताल पानी जाएँ...

यदि आप भी प्रकृति प्रेमी हैं तो उत्तर दें......

परिवार के साथ बड़े लम्बे समय के बाद कहीं बाहर जाने का मौका था. सभी ने साथ मिलकर हेरिटेज ट्रेन में बैठकर पाताल पानी जाने का प्लान बनाया था. 

प्रकृति प्रेमी होने के नाते, मुझे भी उत्सुकता थी, कि कुछ समय कॉन्क्रीट के जंगलों से दूर प्रकृति का सान्निध्य मिलेगा.
परन्तु वहां जाकर देखा, तो मन ग्लानि से भर उठा.
गर्मी की शुरुआत में ही पेड़ पौधे और पानी लगभग सुख चूका था. बचे हुए पानी में और बाहर, जहाँ तहाँ प्लास्टिक के गिलास और जंकफूड के पैकेट बिखरे पड़े थे, और वहां घूम रहे मूक बन्दर वह मनुष्यों द्वारा दूषित जल पीने को मजबूर थे. मन चाहा कि उसी समय वहाँ का कचरा समेटने लगूँ, परन्तु न तो वहां गार्बेज बैग था न ही कोई डस्टबिन, जहाँ वह कचरा डाला जा सकता था.
वापस ऊपर आकर देखा तो गन्ने की चरखी लगी है और वैसे ही गिलास में गन्ने का रस बेचा जा रहा है.
निश्चय किया कि अगले सप्ताह फिर गार्बेज बैग और दस्ताने लेकर आना है, और यहाँ कम से कम पानी में से वो गंदे गिलास निकालकर मूक प्राणियों पर हम जैसे लोगों द्वारा हो रहे अत्याचार को रोकना है. परन्तु मेरा जाना तो केवल एक दिन, तय हुआ है, और गन्दगी फ़ैलाने वाले सैकड़ों लोग वहां रोज़ जा रहे हैं.

क्या इसे रोकने का कोई उपाय नहीं है?

Monday, 1 October 2018

जीना है तो जल बचाओ...


जीवित रहने के लिए हमें ही बचाना होंगे पानी और पेड़

सविनय निवेदन,
इंदौर शहर में लगातार कुछ वर्षों से औसत से कम वर्षा हो रही है. और अंधाधुंध हो रही बोरिंग से धरती का जल स्तर गिरता जा रहा है. इंदौर में औसत वर्षा ३५ से ४० इंच तक आँकी जाती है. परन्तु अंधाधुंध बोरिंग और पेड़ों की कटाई देखते हुए लगता है , कि ८० इंच बारिश भी अब इंदौर की जनता के लिए पर्याप्त नहीं होगी.
जहाँ भी पानी की समस्या शुरू होती है, वहां घर घर में प्राइवेट बोरिंग किये जाते हैं. और फिर पानी को इस तरह बर्बाद किया जाता है, जैसे हमारे पास अथाह पेय जल सम्पदा है.
भवन निर्माण के समय लोग छत का ड्रेन सिस्टम भी गटर से जोड़ देते हैं, जिससे स्वच्छ जल भी गंदे पानी के साथ मिलकर गटर में बह जाता है.
गावों का तेजी से शहरीकरण किया जा रहा है, और नई-नई टाउनशिप बनाकर भवन बनाने के लिए वहाँ स्थित पेड़ों की निर्दयता से कटाई की जा रही है, जैसे हम खुद ही ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम हैं, और ये पेड़ बस धरती पर बोझ हैं. पेड़ों की कटाई और पेट्रोल चलित गाड़ियों की अधिकता से वातावरण में प्रदुषण बढ़ता जा रहा है, और नागरिक विभिन्न प्रकार की रोगों से ग्रसित हो रहे हैं.
जल्दी ही कुछ नहीं किया गया, तो भयावह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. 
अतः सभी भारतीय जन से निवेदन है, कि कल की भयावह स्थिति का सामना करने के लिए हमें अभी से कदम उठाने होंगे.
कृपया, छत के पानी को संगृहीत कर पुनः धरती में संचय करने की व्यवस्था कीजिये. ज़्यादा से ज़्यादा पेड़-पौधे लगाइये. पेड़ों की कटाई को रोकिये. हरे भरे पेड़ों की कटाई के बजाय उनके स्थानांतरण में सहायता दीजिये.


भारतीय

Saturday, 8 September 2018

जागो भारत जागो, हमें गुलाम इंडिया नहीं आज़ाद हिन्द चाहिए

जागो भारत जागो, 
हमें गुलाम इंडिया नहीं आज़ाद हिन्द चाहिए
आज़ादी के समय, मीडिया की चाटुकारिता ने गाँधी और नेहरू की सच्चाई कभी जनता के सामने नहीं आने दी. . लेकिन आज सच छुपाये नहीं छुप रहा. आज यूट्यूब और गूगल ने नेहरू और गाँधी की पोल खोल कर रख दी है. यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियोस वायरल हुए हैं, जो पूरे सबूतों के साथ  इनके नंगे सच उजागर कर रहे हैं. जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्त्व में आज़ाद हिन्द फ़ौज के  सैनिक फिरंगी सेना के दांत खट्टे करते हुए अपनी जान पर खेल रहे थे, तब तथाकथिक "महात्मा" गाँधी पराई स्त्रियों  के साथ निर्वस्त्र सोकर और नहाकर वीभत्स हरकतों को ब्रह्मचर्य प्रयोग का नाम दे रहे थे, नेहरू के तो सारे ही कृत्य अति शर्मनाक हैं. ब्रिटिश शासन ने नेताजी की सेना के हाथों सत्ता खोने के डर से नेहरू जैसे चाटुकार को देश सौंप दिया. पर अब वीडियो वायरल हो रहे हैं कि इन ब्रिटिश चाटुकारों को देश चलाने के लिये  ९० साल की लीज़ पर दे दिया गया था. अगर ये सच है तो क्यों  नहीं हम सच्ची आज़ादी को अपना लेते, सुभाष चंद्र बोस जी के "आज़ाद हिन्द" के स्वप्न को सच कर लेते. 
जागो भारत जागो, 
हमें गुलाम इंडिया नहीं आज़ाद हिन्द चाहिए
Courtesy
https://www.youtube.com/watch?v=XadCAC3jMkw
https://www.youtube.com/watch?v=gaiAgGXsXu4&t=789s
https://www.youtube.com/watch?v=EITkL4CU0Co
https://www.youtube.com/watch?v=EITkL4CU0Co
https://www.youtube.com/watch?v=j7HCyuWV_I0

स्वतंत्र भारत आंदोलन

जागो भारत जागो  
हमें गुलाम इंडिया नहीं 
"आज़ाद हिन्द" अर्थात "स्वतंत्र भारत" चाहिए

आज़ादी के समय, मीडिया की चाटुकारिता ने गाँधी और नेहरू की कभी पोल नहीं खोली. लेकिन आज सच छुपाये नहीं छुप रहा. आज यूट्यूब और गूगल ने नेहरू और गाँधी की पोल खोल कर रख दी है. यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियोस वायरल हुए हैं, जो पूरे सबूतों के साथ  इनके नंगे सच उजागर कर रहे हैं. जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्त्व में आज़ाद हिन्द फ़ौज के सैनिक फिरंगी सेना के दांत खट्टे करते हुए अपनी जान पर खेल रहे थे, तब तथाकथित महात्मा, गाँधी पराई स्त्रियों के साथ निर्वस्त्र विचरण कर, सोकर औरवीभत्स हरकतों को ब्रह्मचर्य प्रयोग का नाम दे रहे थे, इन दुष्कृत्यों का खुलासा स्वयं मनु बेन की डायरी से होता है. नेहरू और उसके खानदान के तो लगभग सभी कृत्य राष्ट्रविरोधी हैं, जिसने गाँधी के कंधे पर बन्दूक रखकर हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू संस्कृति का विनाश करने के सारे प्रयास किये, और भारतीय जनता की अनभिज्ञता के कारण वह अनेक हिन्दू संस्कृति विध्वंसक कार्यों में सफल भी हो गया. ब्रिटिश शासन ने नेताजी की सेना के हाथों सत्ता खोने के डर से नेहरू जैसे चाटुकार को देश सौंप दिया.वीर भगत सिंह व उनके सहयोगियों ने स्वतंत्र देश के स्वप्न को पूरा करने के लिए न केवल प्रयास किया, वरन उन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान की रूपरेखा भी तैयार कर ली थी. परन्तु फिरंगियों और उनके चाटुकार भारतीयों ने उन स्वप्नों को ध्वस्त कर दिया. उनके लेख नष्ट कर दिए गए. और अब नेहरू के चापलूस कहते हैं, की भगत सिंह ने जनता को नेहरू का अनुसरण करने के लिए कहा था. पर अब वीडियो वायरल हो रहे हैं कि इन ब्रिटिश चाटुकारों को देश चलाने के लिये  ९० साल की लीज़ पर दे दिया गया था. अगर ये सच है तो क्यों नहीं हम सच्ची स्वतंत्रता को अपना लेते, सुभाष चंद्र बोस जी के "आज़ाद हिन्द" के स्वप्न को सच कर लेते. क्योंकि फिरंगियों ने इंडिया, अपने चापलूसों को लीज़ पर दिया था, सनातन भारत नहीं. 

जागो भारत जागो  हमें गुलाम इंडिया नहीं, "आज़ाद हिन्द" अर्थात "स्वतंत्र भारत"चाहिए

इंदौर के विख्यात देवी अहिल्या विश्व विद्यालय ने यही प्रयास जनता के मध्य लाने का प्रयास किया है, उन्होंने एक आवेदन पर जनता के हस्ताक्षर कर प्रधानमंत्री को सौपने का निश्चय किया है, कि भारत को केवल भारत नाम से जाना जाये, न कि राष्ट्र विरोधियों द्वारा दिए गए सम्बोधनों   इंडिया और हिन्दुस्तान के द्वारा.
कृपया जन जागृति में सहयोग अपेक्षित है.


भारतीय


Courtesy
1) https://www.youtube.com/watch?v=XadCAC3jMkw
2) https://www.youtube.com/watch?v=GA2yU2f3vpY
3) https://www.youtube.com/watch?v=gaiAgGXsXu4
4) https://www.youtube.com/watch?v=gaiAgGXsXu4
http://www.dauniv.ac.in/notices/News280219.pdf

Friday, 31 August 2018

पूर्ण कर्पूर आरती (Poorna Karpoor Aarati)




ॐ नमः शिवाय!
पूर्ण कर्पूर आरती

कर्पूर  गौरं  करुणावतारम, संसार सारम भुजगेन्द्र हारं
सदावसंतं हृदयारविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि
कर्पूर पूरेण मनोहरेण, सुवर्ण पात्राम जग सांगतेन
प्रदीप्त वासाय स्तव सांगतेन, निरञ्जनम तं जगदीश कुर्यात...